कोटा सेंट्रल जेल में रिश्वत के मामले में बंद बारां के पूर्व जिला कलेक्टर हुए रिहा।

पिछले 8 माह से बंद से बंद थे पूर्व जिला कलेक्टर इंद्र सिंह राव।

कोटा सेंट्रल जेल में रिश्वत के मामले में बंद बारां के पूर्व जिला कलेक्टर हुए रिहा।

इंद्र सिंह राव पर पेट्रोल पंप की एनओसी जारी करने के की एवज में 1.40 लाख रूपये रिश्वत लेने का  है आरोप।

रिश्वत के आरोपी बारां के पूर्व कलेक्टर इंद्रसिंह राव को हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। इसके बाद आज कोटा सेंट्रल जेल से निलंबित IAS इंद्रसिंह राव को रिहा किया गया। इंद्रसिंह राव 233 दिन तक जेल की सलाखों में कैद रहे।

राव के परिजन उन्हें लेने जेल  आए। जेल से छूटते ही राव कार में सवार होकर चले गए।

8 महीने में जेल से छूटे
मामले में राव के विरुद्ध कोर्ट में मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलने को आधार बनाकर उनके वकील ने राजस्थान हाईकोर्ट में जमानत की याचिका लगाई थी।

                                                                       

इस पर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व कलेक्टर इंद्र सिंह राव को जमानत पर जेल से रिहा करने का आदेश दिया था। इंद्रसिंह राव करीब 8 महीने में जेल की सलाखों से बाहर आए है। 

 कोटा एसीबी ने पेट्रोल पंप की एनओसी (NOC) जारी करने की एवज में 9 दिसम्बर 2020 को बारां के तत्कालीन कलेक्टर के पीए महावीर प्रसाद को 1 लाख 40 हजार की रिश्वत लेते ट्रेप किया था। जिसे एसीबी ने कोर्ट में पेश किया था। जहां से कोर्ट ने महावीर को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा था।  

इसके बाद  23 दिसंबर को पूछताछ के बाद इंद्र सिंह राव को गिरफ्तार कर 24 दिसम्बर को कोर्ट में पेश किया था। 1 दिन के रिमांड के बाद  कोर्ट ने 25 दिसम्बर को जेल भेजने के आदेश दिए थे। एसीबी,घूसकांड में दोनों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में 565 पेज की चार्जशीट पेश कर चुकी है।